Friday, November 26, 2010

२६/११ के बाद दो साल और अब भी वही के वही...!!

२६/११ की आज दूसरी सालगिरह है..बेशक यह अविस्मरणीय दुख का दिन है जिसे कि आम मुम्बईकर और सम्पूर्ण भारतवासी कभी भुला नही सकते !
पर इसके साथ साथ यह और अन्य बातो को भी याद करने का दिन है....
यह अन्य बाते मसलन मुम्बई हमले के बाद देश सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के वायदे, जो कि अभी तक सिर्फ़ कुछ बख्तरबन्द गाडियो और जवानो के द्वारा फ़्लैग मार्च को छोडकर पूरे नहीं हो पाये है !

अन्य बातो मे ये भी कि उस समय जब देश अपने परिजनों की सकुशल घर लौटने और देश के जवान आतंकियों से लगातार अपनी जान की परवाह न करते हुए आतंकियों से लोहा लेने में व्यस्त थे तभी महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने बदतमीजी की सारी हदे पार करते हुये कहा था कि "बडे बडे शहरो मे ऐसी छोटी छोटी घट्नाये होती रहती है।"

खैर उस समय कांग्रेस आलाकमान ने जनता के तत्कालीन गुस्से को देखते हुये मुख्य्मन्त्री विलासराव देशमुख के साथ साथ महाराष्ट्र के गृहमंत्री पाटिल को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया था !
लेकिन नतीजा क्या रहा ...जो महाराष्ट्र की जनता मुम्बई हमलो के लिये अक्रोशित थी और विरोध मे जिसने सारे देश मे जगह जगह पर सैकडो किमी लम्बी मानव कतारें बनायी जो कि हाथ मे मोमबत्ती लेकर प्रदर्शन कर रही थी ...वही जनता अपना सारा दुख भुलाकर आगे हुये चुनावो मे वोट डालने के लिये कतारो मे न लग सकी...।

परिनाम क्या हुआ...फ़िर वही कांग्रेस की सरकार केन्द्र व राज्य मे आयी और फ़िर से पाटिल को राज्य सरकार मे गृहमंत्री बनाया गया और विलासराव देशमुख को केन्द्र मे मलायीदार ओहदा दिया गया। क्या ये उन शहीदों की शहादत पे तुषारापात नहीं था |

अन्य बातों में ये भी की उस हमले में पकडे गए एकमात्र आतंकी कसब को सुप्रीम कोर्ट के द्वारा फांसी दिए जाने के वावजूद नागरिको के पैसे से उसकी खिदमत की जा रही है और उसकी सुरक्षा उन जवानो को करनी पड़ रही है जिन्होंने मुंबई हमलों में शहीद अपने भाइयों की अर्थियों को कंधा दिया था और जिसके पीछे कसब और उसके साथी जिम्मेदार थे |

सुरक्षा व्यवस्था की बात की जाये तो आज भी देश भर मे अप्रशिक्षित पुलिस के जवान अपनी अंग्रेजों के जमाने की रायफ़ल लेकर विधिवत आर्मी के द्वारा प्रशिक्षित आतन्कवादियो से निपटने को मुश्तैद है !

हमारी आतंक रोधक तन्त्र आज भी कमजोर है जबकि इसके समकक्ष पाकिस्तान की भारत को बर्बाद करने की इच्छा लगातार बलवती हुयी है ।
अगर अमेरिका जैसे विकसित देशो से तुलना की जाये तो वहा प्रत्येक एक लाख आबादी पर ५०० पुलिस कर्मी होते है; वही भरत मे ये संख्या १२६ है और उनमे भी अधिकतर पुलिस कर्मी माननीयो की सुरक्षा मे ही निमग्न रहते है।

रही बात खूफ़िया विभाग की तो रॉ के पूर्व प्रमुख गिरीश चन्द्र सक्सेना ने सन २००१ मे ही दी गयी पपनी रिपोर्ट मे सिफ़ारिश की थी कि आई०बी० मे फ़ील्ड ड्यूटी मे कम से कम ३०००० नये कर्मचारियो को तैनात किया जाना चाहिये । लेकिन आई०बी० मे कर्मचारियो की कुल संख्या लगभग २५००० है जिसमे से एक तिहायी ड्राईवर, चपरासी, और प्रशाशकीय और सचिवालय स्तर के कर्मचारी है । फ़ील्ड ड्यूटी मे कर्मचारियो की संख्या लगभग ३५०० है जिसे कि पूर्व रॉ प्रमुख सक्सेना के अनुसार ३०००० होना चहिये ! और इन फ़ील्ड ड्यूटी मे तैनात ३५०० मे से भी आधे से अधिक राजनैतिक गुप्तचरी मे तैनात है ।
ऐसे मे ये सोचने वली बात है कि १.२ अरब की जनसंख्या वाले इस देश मे ये संख्या आटे मे नमक के बराबर न होकर उससे भी कम ही है ।

एक तरफ जहा देश के अंदरूनी सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है तो वही अगर देश के रहनुमाओं ने अपनी अच्छाशक्ति को मजबूत नहीं किया तो कोई फायदा नहीं होने वाला ! दो साल आज हो गए है और मैंने एक बार भी प्रधानमंत्री या गृहमंत्री की इस मामले कोई सख्त आवाज/चेतावनी नहीं सुनी जो उन्होंने पाकिस्तान से आतंकियों को सौपने के लिए या आतंकी गतिविधियाँ रोकने के लिए कही हो |

देखिये एक बात तो निश्चित है की जब तक गृहमंत्री जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे लोग आतंक का रंग नहीं पहचान पाएंगे, उन्हें कश्मीर के आतंकी 'गुमराह भाई' नज़र आएंगे, बंलादेश के घुसपैठियों को उनके द्वारा संसद में 'नौकरी की तलाश में ए भाई' कहेंगे , अफजल गुरु और कसाब में वोटों की पोटली नजर आती रहेगी तब तक कितने ही सुधार क्यों न हो जाये सब सब के सब व्यर्थ ही साबित होंगे |

खैर आइये हम सब उन महान शहीदों को नमन करें की जिन्होंने देश के सम्मान और सुरक्षा के लिए अपनी जान तक न्योछावर कर दी ! उनका ऋण भारत वासी कभी भी नहीं भुला पाएंगे |




7 comments:

  1. कसाब को फांसी मिलती तो दिल को तसल्ली मिलती। अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि।

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  2. नमन!
    यथार्थपरक पोस्ट!

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  3. ये कौन रोया है दरख्तों से लिपट के
    ये किसकी आह से पत्ते जले हैं ...?
    ये किसके जिस्म की तड़प है 'हीर'
    जो आज पोरों में यूँ दर्द उठा है ......??.

    शहीदों को श्रद्धासुमन .....!!

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  4. बेहतरीन अभिव्यक्ति...................

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  5. सबके अरमान लटका रखे हैं, व्यवस्था की प्रक्रियाओं ने।

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  6. बेहद भावपूर्ण अभिव्यक्ति.........

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  7. शहीदों को नमन ...विचारणीय पोस्ट ...शुक्रिया

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