Monday, August 2, 2010

एक नया जहाँ


यहाँ नफ़रत है,धोखा है,झूठ है
ख़ौफ़ और आतंक के साये भी है दूर तलक
चलो चलें ,

एक नया जहाँ ढूंढते है हम तुम
दोनो मिलकर...!!

7 comments:

  1. बिल्कुल जी....

    बढ़िया कहा!

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  2. चलो दिलदार चलो चाँद के पार चलो ....
    हम हैं तैयार चलो .......

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  3. preet mein sarobaar rachna!

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  4. शानू जी
    आपके ब्लॉग पर आकर अच्छा लगा ...............बहुत अच्छा लिखते हैं आप

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  5. @ समीर जी भाईसाहब ..धन्यवाद..!

    @ नीरज जी भाईसाहब ..धन्यवाद..!

    @ सुमन जी..धन्यवाद..!

    @ हरकीरत हीर जी.."चाँद के पर चलो"..धन्यवाद..!

    @ पारूल जी..धन्यवाद..!

    @ सुमन 'मीत' जी.. धन्यवाद..अब आशा है की आप आती भी रहेंगी ...!!

    आप सबका खूब खूब आभार..हमे यूँ ही अपने स्नेह एवं मार्गदर्शन से प्रेरित करते रहे..!!

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आपके आशीर्वचन हमारे लिए... विश्वाश मानिए हमे बहुत ताक़त मिलती आपकी टिप्पणियो से...!!