Showing posts with label क्रोध. Show all posts
Showing posts with label क्रोध. Show all posts

Sunday, June 27, 2010

ऐ मेरे क्रोध

ऐ मेरे क्रोध
तुम कब आये
और आकर  चले भी गए
पर छोड़ गए पीछे निशान
अपने आने के,

पर अरे भले आदमी
कम से कम एक पाती ही भेज देते
अरे छोडो ये आधुनिक जमाना है
कम से कम एक एस.एम्. एस. ही कर देते
जिससे  अपने आने की  खबर  देते
ताकि मै हो जाता सचेत
तुम्हारे आने से पहले ही
तुम्हारी आव-भगत करने को
और शायद तब बच जाता
ये नुकसान होने से
जो हुआ है मुझे
तुम्हारे बिना बताये आने से,,,!!